श्रावण का पहला सोमवार/Sawan ka pahala Somvar/क्यों है खास/ क्यों चढ़ाते हैं लोग, भगवान शंकर को जल।

दुनिया की सबसे प्राचीन संस्कृति “सनातन” में श्रावण माह और उसके पहले सोमवार का काफी महत्व बताया गया है। भारतीय सनातन कैलेंडर के तहत अभी श्रावण का माह शुरू हुआ है जो 58 दिन तक रहेगा और 31 अगस्त को समाप्त होगा। इस बार श्रावण माह “दो महीनो” के बराबर है इसलिए इस माह में 08 सोमवार पड़ेंगे।

सनातन संस्कृति की मान्यता के अनुसार, श्रावण माह, भगवान शिव के लिए काफी प्रिय मानी जाती है इसलिए भक्त लोग, श्रावण माह में भगवान शंकर की खूब पूजा – आरती करते है। कहा जाता है कि भगवान शिव को सिर्फ स्वच्छ/शुद्ध जल चढ़ाने से खुश किया जा सकता है।

भगवान शिवशंकर सिर्फ जल चढ़ाने से क्यों हो जाते है खुश! आइए जानते हैं!!

इसकी कहानी इस प्रकार है कि एकबार देवताओं और दानवों ने मिलकर समुंद्र का मंथन करना शुरू किया। जब समंदर को मथा जा रहा था तो उससे एक पदार्थ निकलकर बाहर आया जिसे हलाहल विष कहा गया। विष के प्रभाव से जीव – जंतु सहित देवता और दानव आदि सभी प्राणी मरने लगे। जिसके कारण इस विष का समाप्त करना बहुत आवश्यक हो गया नही तो सृष्टि का अंत भी हो सकता था। घोर विपत्ति जानकर सभी देवता भगवान शंकर से अनुरोध किए कि हमलोग को इस विपत्ति से बाहर निकालिए। भगवान शंकर कृपालु होकर उस घातक विष को पी गए और देवताओं सहित सभी प्राणियों की रक्षा किए। देवताओं और रक्षसो ने खुश होकर भगवान शिव को देवो का देव “महादेव” कहकर संबोधित किया उसी समय से भगवान शिव को महादेव कहा जाने लगा।

देवताओ और सारे प्राणी सहित सृष्टि की रक्षा तो भगवान शंकर द्वारा हुई किंतु विष के प्रभाव के कारण भगवान शंकर का बुरा हाल हो गया। उनके शरीर में काफी जलन होने लगी। वे असहज महसूस करने लगे। इस जलन को शांत करने के लिए भगवान शिव अपने ऊपर जल डालना शुरू किए जिससे उन्हें बहुत शांति मिली। जलन से राहत मिला। ऐसा माना जाता है कि विष के प्रभाव के कारण आज भी भगवान शिव शंकर असहज महसूस करते है और उन्हें यह शांति जल से मिलती है। अतः जो भगवान शंकर के ऊपर जल चढ़ता है। उन्हें शांति प्रदान करता है।भगवान शिव भी खुश होकर उसे आशीर्वाद देते है। यही कारण है कि सिर्फ जल चढ़ाने से भगवान शिव खुश हो जाते है।

श्रावण महीना में किसी भी प्रकार का अनुचित/अपवित्र कार्य को नहीं करना चाहिए। दान, धर्म और सत्य कर्म आदि का पालन करना चाहिए। सदाचार से जीवन व्यतीत करना चाहिए और भगवान शिव का पूजा – अर्चना करना चाहिए।।

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