Guru Purnima 2023/ कब है “गुरु पूर्णिमा”

भारत में “गुरु पूर्णिमा” नामक त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार हिंदी कैलेंडर के अषाढ़ महीना के पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसे “हिंदू, जैन और बौद्ध” लोग धूमधाम से मनाते है क्योंकि ये सभी धर्म की शुरुआत हिंदू यानी सनातन संस्कृति से ही हुआ है। मुस्लिम लोग, इसे नही मानते क्योंकि वे पश्चिमी देशों से आया हुआ “अरेबिक रिलीजन इस्लाम” धर्म को मानते है।

इस विशेष दिन “गुरु” की विधिवत पूजा की जाती है। चुकी गुरु ही व्यक्ति के जीवन को प्रकाश से भर देते हैं। गुरु, अपने शिष्य को “सत्य पर चलने, आध्यात्मिक उन्नति करने, अपने धर्म की रक्षा करने सहित” तमाम तरह की शिक्षा – दीक्षा देते है। गुरु अपने शिष्य को इतना सक्षम बना देते हैं कि आगे चलकर शिष्य मानवता के इतिहास में कुछ बड़ा कर सके जिससे मानव सहित पूरे विश्व का कल्याण हो।

“व्यक्ति और व्यक्तित्व” के निर्माण, गुरु द्वारा ही संभव है इसलिए सनातन संस्कृति में एक दोहा बहुत प्रचलित है:

गुरु, गोविंद दोनो खड़े, काके लागू पाव।। बलहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताए।।

Guru purnima 2023
Guru purnima 2023 @zee news

मतलब शिष्य के सामने “गुरु और ईश्वर” दोनो एकसाथ प्रकट हो गए। ऐसी स्थिति में शिष्य को समझ में नहीं आ रहा था कि पहले किनका चरण स्पर्श किया जाय लेकिन इस दुविधा को भगवान यह कहकर खत्म कर दिए कि “गुरु” ईश्वर से भी बड़ा होता है इसलिए पहले गुरु का चरण स्पर्श किया जाय।।

इस प्रकार “सनातन संस्कृति” में गुरु का स्थान सबसे ऊपर रखा गया है मतलब आदर/सम्मान के भाव से गुरु का स्थान, “माता – पिता और ईश्वर” से उच्चा होता है इसलिए सबसे पहले पूजा गुरु की होती है।

गुरुपूर्णिमा कब है (GURUPURNIMA KAB HAI):

गुरु पूर्णिमा त्योहार मनाने की शुभ तिथि 03 जुलाई, 2023 और समय रात के 12/40 से दिन के 10/41 तक है।।

गुरुपूर्णिम किस प्रकार मनाया जाता है (GURUPURNIMA KAISE MANATE HAI):

  • गुरु पूर्णिमा बड़े ही धूमधाम से और पवित्रता के साथ मनाया जाता है।
  • इस दिन लोग या तो उपवास रखते है या सिर्फ फल का आहार करते है ताकि व्यक्ति का ध्यान सिर्फ गुरु पूजन पर ही लगा रहे
  • लोग स्नान, ध्यान करके अपने “गुरु” की विधिवत पूजा करते है।
  • जिनके गुरु नही है वे मंदिर जाकर भगवान शिव सहित अन्य देवी – देवताओं की पूजा – अर्चना करते है।
  • या घर में किसी ज्ञानवान ब्रह्मण (पुरोहित) को बुलाकर विधिवत गुरु पूजन या हवन आदि करते है।
  • पूजा – अर्चना के बाद लोग “अपने धर्म की रक्षा करने, अपने गुरु, परिवार, समाज की रक्षा करने और सत्य मार्ग पर चलने” की शपथ लेते है।

गुरु की पूजा के साथ – साथ दूसरे भी कई कारक है जिसके कारण गुरुपूर्णिमा का दिन खास हो जाता है जैसे:

  • गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा” के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान वेदव्यास का जन्म हुआ था। भगवान वेदव्यास ही है जिन्होंने महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना की है।
  • आज के दिन नए विद्यार्थी को अध्ययन प्रक्रिया में शामिल किया जाता है और उन्हें आध्यात्मिक उन्नति की शिक्षा दी जाती है इसलिए भी यह दिन खास हो जाता है।
  • इस दिन “गुरु” से अपने गलत कर्मो की माफी मांगी जाती है और जीवन, धर्म के उन्नति के साथ सत्य पथ पर चलने की आशीर्वाद भी गुरु से लिया जाता है।।
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